
1. मोदी का करिश्मा और राष्ट्रीय नेतृत्व का प्रभाव
भाजपा ने इस चुनाव को पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़ा। मोदी की लोकप्रियता और “डबल इंजन सरकार” के नारे ने मध्यवर्ग और युवाओं को आकर्षित किया। पीएम मोदी ने दिल्ली की जनता को आश्वस्त किया कि केंद्र की योजनाएं जारी रहेंगी और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही, बजट 2025 में 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स छूट जैसे फैसलों ने मध्यवर्ग का समर्थन हासिल किया ।
2. आप की छवि पर प्रहार और भ्रष्टाचार के आरोप
अरविंद केजरीवाल की “स्वच्छ राजनीति” की छवि को भाजपा ने शराब घोटाले और ‘शीशमहल’ विवाद जैसे मुद्दों से धूमिल किया। केजरीवाल सहित आप के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। इससे न केवल आप का मध्यवर्गीय समर्थन कमजोर हुआ, बल्कि ईमानदारी के प्रतीक के रूप में केजरीवाल की छवि भी धराशायी हुई ।
3. जमीनी रणनीति और संगठनात्मक ताकत
भाजपा ने बूथ-स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक माइक्रो-मैनेजमेंट का उदाहरण पेश किया। प्रत्येक केंद्रीय मंत्री को दो सीटों की जिम्मेदारी दी गई, और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने 10,000 से अधिक ड्राइंग रूम बैठकों के माध्यम से जमीनी संपर्क बनाया। इसके अलावा, दलित और ओबीसी समुदायों के साथ 4,500 से अधिक बैठकें करके पार्टी ने आप के पारंपरिक वोट बैंक को तोड़ा ।
4. वादों का ‘मास्टरस्ट्रोक’ और मुफ्त योजनाओं की गारंटी
आप की मुफ्त बिजली-पानी जैसी योजनाओं को “रेवड़ी संस्कृति” कहकर खारिज करने की पुरानी रणनीति को बदलते हुए, भाजपा ने इस बार इन योजनाओं को जारी रखने का वादा किया। साथ ही, महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक भत्ता और 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज जैसे नए प्रलोभन दिए। इससे आप के वोट बैंक, विशेषकर झुग्गी बस्तियों और महिला मतदाताओं में सेंध लगाई गई ।
5. विपक्ष की फूट और सामाजिक ध्रुवीकरण का अभाव
इंडिया गठबंधन (I.N.D.I.A.) के बिखराव और कांग्रेस-आप की आपसी प्रतिस्पर्धा ने भाजपा को फायदा पहुंचाया। उदाहरण के लिए, नई दिल्ली सीट पर कांग्रेस के वोटों ने आप को हराने में मदद की। इसके अलावा, भाजपा ने इस बार साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण से बचते हुए “सबका साथ, सबका विकास” के मॉडल पर जोर दिया, जिससे मुस्लिम बहुल इलाकों में भी समर्थन मिला ।
एक रणनीतिक विजय जो बदल सकती है राष्ट्रीय राजनीति
दिल्ली में भाजपा की जीत केवल चुनावी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह एक सुनियोजित रणनीति, नेतृत्व की दृढ़ता, और विपक्ष की कमजोरियों का परिणाम है। इस जीत से न केवल ब्रांड मोदी मजबूत हुआ है, बल्कि भाजपा ने यह संदेश भी दिया है कि वह क्षेत्रीय दलों को चुनौती देने में सक्षम है। आने वाले बिहार और पश्चिम बंगाल चुनावों में इस जीत का प्रभाव देखने को मिल सकता है ।