
RBI MPC मीटिंग: क्या बदला है पिछली बैठक के बाद से? 25 bps की दर में कटौती क्यों संभावित है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 2025 की पहली और वर्तमान वित्तीय वर्ष की आखिरी बैठक 7 फरवरी को समाप्त की। इस बैठक में एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसके तहत RBI ने पांच साल में पहली बार रेपो रेट में 25 bps (बेसिस पॉइंट) की कटौती की है। यह कदम आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की दिशा में उठाया गया है। आइए जानते हैं कि पिछली MPC बैठक के बाद से क्या बदलाव हुए हैं और यह दर कटौती क्यों जरूरी हो गई।
RBI MPC की नई बैठक: मुख्य बिंदु
RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में हुई इस बैठक में आर्थिक विकास, मुद्रास्फीति, और वैश्विक अनिश्चितताओं पर चर्चा हुई। पिछली बार दिसंबर 2024 में हुई बैठक के बाद से कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जिन्होंने इस दर कटौती को संभावित बना दिया।
क्या है रेपो रेट?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। इस दर में कटौती से बैंकों के लिए उधार लेना सस्ता हो जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ता है और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
पिछली बैठक के बाद क्या बदलाव हुए?
- मुद्रास्फीति में कमी: पिछले कुछ महीनों में मुद्रास्फीति में कमी आई है। वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों, विशेष रूप से खाद्य पदार्थों जैसे अनाज और खाद्य तेलों में गिरावट देखी गई है। RBI का लक्ष्य मुद्रास्फीति को 4% पर बनाए रखना है, और हाल के आंकड़े इस दिशा में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
- तरलता में कमी: जनवरी 2025 से बैंकिंग प्रणाली में तरलता की स्थिति तंग हो गई है। RBI ने इस स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे कि लंबी अवधि के वेरिएबल रेपो रेट (VRR) और ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO)। इन उपायों का उद्देश्य तरलता को बनाए रखना है।
- रुपये की गिरावट: नवंबर 2024 से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट देखी गई है। अमेरिकी चुनावों के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) ने भारतीय बाजारों से $7.5 बिलियन निकाल लिए हैं। इस स्थिति में RBI को रुपये को स्थिर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है।
- वैश्विक अनिश्चितता: डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद वैश्विक व्यापार युद्ध का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका ने कनाडा और मैक्सिको से आयात पर 25% और चीन से आयात पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है। हालांकि भारत अभी इससे प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन भविष्य में इसके आर्थिक विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।
क्यों जरूरी है 25 bps की दर कटौती?
- आर्थिक विकास को बढ़ावा: भारत की आर्थिक विकास दर (GDP growth) पिछले कुछ समय से सुस्त रही है। दर कटौती से उधार लेना सस्ता होगा, जिससे निवेश और उपभोग में वृद्धि होगी।
- मुद्रास्फीति पर नियंत्रण: मुद्रास्फीति में कमी के साथ, RBI के पास दर कटौती का स्पेस बन गया है। यह कदम मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा।
- वैश्विक दबाव: अन्य देशों ने पहले ही ब्याज दरों में कटौती शुरू कर दी है। भारत को भी वैश्विक दबावों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाना पड़ा है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का दृष्टिकोण
नए RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने पदभार संभालने के बाद से कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके पूर्ववर्ती शक्तिकांत दास की तुलना में उन्हें रुपये के मामले में कम हस्तक्षेप करने वाला माना जा रहा है। यह दृष्टिकोण RBI की मौद्रिक नीति में बदलाव का संकेत देता है।
RBI की इस बैठक में 25 bps की दर कटौती एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की दिशा में उठाया गया है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं और रुपये की गिरावट के कारण RBI को सतर्क रहने की जरूरत है। आने वाले समय में RBI की नीतियां भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित होंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- रेपो रेट में कटौती का क्या प्रभाव होगा?
रेपो रेट में कटौती से बैंकों के लिए उधार लेना सस्ता हो जाएगा, जिससे आम लोगों को सस्ते लोन मिलेंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। - क्या यह कटौती मुद्रास्फीति को प्रभावित करेगी?
हां, यह कटौती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगी, क्योंकि यह आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी। - RBI की आगे की रणनीति क्या होगी?
RBI आने वाले समय में तरलता को बनाए रखने और रुपये को स्थिर करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
इस प्रकार, RBI की यह दर कटौती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम है, जो आने वाले समय में आर्थिक स्थिरता और विकास को सुनिश्चित करेगी।