“राखी गुप्ता: भाजपा की पहली महिला मुख्यमंत्री और दिल्ली की नई राजनीतिक कहानी | Delhi CM Rekha Gupta”

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दिल्ली में BJP का ‘नारी शक्ति’ कार्ड

19 फरवरी 2025 का दिन दिल्ली की राजनीति के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राजधानी की कमान एक ऐसी नेता को सौंपी, जो न केवल तीन दशकों से पार्टी के साथ जुड़ी हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी बन चुकी हैं। राखी गुप्ता, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) से अपना सफर शुरू किया, आज दिल्ली की मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच दिया है। लेकिन सवाल यह है कि BJP ने अन्य दिग्गज नेताओं को छोड़कर एक पहली बार की MLA को यह जिम्मेदारी क्यों दी? इसके पीछे क्या है महिला मतदाताओं को लुभाने की रणनीति? आइए विस्तार से समझते हैं।

राखी गुप्ता का राजनीतिक सफर: DUSU से सीएम तक का सफर

शुरुआती जीवन और शिक्षा

राखी गुप्ता का जन्म दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उन्होंने दौलत राम कॉलेज से स्नातक किया और छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गईं। 1996-97 में वह DUSU की अध्यक्ष बनीं, जहां उन्होंने छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और अपने करिश्माई नेतृत्व से सभी का ध्यान खींचा।

स्थानीय निकाय चुनावों में उभरती हुई नेता

2007 में पहली बार उत्तर पीतमपुरा से नगर निगम की पार्षद चुनी गईं। इसके बाद 2012 और 2017 में भी उन्होंने यह सीट बरकरार रखी। 2022 में वह दक्षिण दिल्ली नगर निगम (SDMC) की मेयर बनीं, जहां उनके कार्यकाल में स्वच्छता अभियान और महिला सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत

2025 के विधानसभा चुनाव में शालीमार बाग सीट से उन्होंने 30,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यहां तक कि उन्होंने AAP के वरिष्ठ नेता को भी पछाड़ दिया, जो इस क्षेत्र में पिछले दो दशकों से सक्रिय थे।

क्यों चुनी गईं राखी गुप्ता? BJP की 5 बड़ी रणनीतियाँ

1. महिला मतदाताओं का भरोसा जीतना

दिल्ली में 2025 के चुनाव में महिला मतदाताओं ने पुरुषों से अधिक वोट डाले (60.92% vs 60.21%)। BJP ने इस डेमोग्राफिक को टार्गेट करते हुए ‘महिला समृद्धि योजना’ जैसे ऐलान किए। राखी के नेतृत्व में पार्टी को उम्मीद है कि यह संदेश जाएगा कि केजरीवाल के 10 साल के बाद अब महिलाएं सत्ता की कमान संभालेंगी।

2. दिल्ली की ‘महिला CM’ विरासत को आगे बढ़ाना

दिल्ली में सुषमा स्वराज (1998), शीला दीक्षित (1998-2013), और अतिशी (2024) जैसी महिला CMs का इतिहास रहा है। BJP चाहती है कि केजरीवाल का कार्यकाल एक “अपवाद” लगे, जबकि महिला नेतृत्व को “नियम” बनाया जाए।

3. विवादों से दूर एक ताज़ा चेहरा

राखी गुप्ता पर कोई भ्रष्टाचार या विवाद का आरोप नहीं लगा, जबकि पार्टी के कुछ दिग्गज नेता अक्सर विवादों में घिरे रहते हैं। यह छवि AAP पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच BJP को ‘साफ-सुथरी’ छवि देती है।

4. स्थानीय निकायों का अनुभव

तीन बार पार्षद और मेयर रह चुकी राखी को दिल्ली की ग्राउंड लेवल समस्याओं की गहरी समझ है। यह अनुभव उन्हें सीधे जनता से जोड़ता है, खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा और सफाई जैसे मुद्दों पर।

5. युवाओं और छात्रों का समर्थन

DUSU की पूर्व अध्यक्ष होने के नाते उन्हें युवा वर्ग का समर्थन हासिल है। BJP इसी बेस को और मजबूत करना चाहती है, खासकर जब 2029 के लोकसभा चुनाव नज़दीक हैं।

दिल्ली में महिला मुख्यमंत्रियों का इतिहास

  • सुषमा स्वराज (1998): प्याज़ के बढ़ते दामों के चलते सिर्फ 52 दिनों तक सीएम रहीं, लेकिन उनकी मजबूत छवि ने BJP को लंबे समय तक फायदा पहुंचाया।
  • शीला दीक्षित (1998-2013): 15 सालों तक दिल्ली को विकास के रास्ते पर ले जाने वाली ‘आयरन लेडी’।
  • अतिशी (2024): केजरीवाल के इस्तीफे के बाद 5 महीने तक कार्यभार संभाला, लेकिन AAP की हार के साथ हटना पड़ा।

राखी गुप्ता अब इस कड़ी में चौथी महिला बन गई हैं, जो दिल्ली की जनता के लिए एक स्थिर सरकार का प्रतीक हैं।

BJP की महिला-केंद्रित नीतियाँ: क्या बदलाव लाएगी नई सरकार?

  • महिला समृद्धि योजना: हर महिला को ₹2,500 मासिक आर्थिक सहायता।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण किट: ₹21,000 नकद + 6 पोषण किट।
  • मुफ्त कैंसर जांच: सरकारी अस्पतालों में सर्वाइकल, ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर की स्क्रीनिंग।
  • महिला सुरक्षा: हर वार्ड में ‘शक्ति डेस्क’ और महिला हेल्पलाइन नंबर।

इन योजनाओं के पीछे BJP का लक्ष्य है गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाना, जो AAP के ‘झूठे वादों’ से निराश थीं।

विपक्षी दलों पर BJP की चुनावी मार

  • AAP पर भ्रष्टाचार के आरोप: दिल्ली लिक्वर पॉलिसी और स्कूलों में घपलों के मुद्दे BJP के हाथ मजबूत करते रहे।
  • कांग्रेस की अनुपस्थिति: कांग्रेस लगातार तीसरे चुनाव में जमानत तक जप्त होने से बाहर रही।
  • पार्थिव चौहान vs राखी गुप्ता: पश्चिमी दिल्ली के दिग्गज नेता पार्थिव को टिकट न देकर BJP ने साबित किया कि वह नए चेहरों को प्राथमिकता दे रही है।

चुनौतियाँ: राखी गुप्ता के सामने क्या हैं मुश्किलें?

  1. AAP के समर्थकों का विरोध: केजरीवाल के कार्यकाल में मुफ्त बिजली-पानी की स्कीम को बंद करने पर आम आदमी नाराज़ हो सकता है।
  2. केंद्र-राज्य संबंध: LG के साथ तालमेल बिठाना और केंद्रीय योजनाओं को लागू करना।
  3. प्रदूषण और ट्रैफिक: दिल्ली की सबसे बड़ी समस्याओं पर ठोस एक्शन प्लान की दरकार।

दिल्ली के लिए नई उम्मीद

राखी गुप्ता का सीएम बनना न केवल BJP के लिए, बल्कि देशभर की महिला नेताओं के लिए एक मिसाल है। अगर वह स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रहती हैं और महिलाओं की सुरक्षा व रोजगार को प्राथमिकता देती हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में BJP को इसका लाभ मिल सकता है। फिलहाल, दिल्लीवासियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह ‘गुलाबी नेतृत्व’ राजधानी को नई दिशा दे पाएगा।

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