“700 लीड रोल और 900 फिल्में: प्रेम नजीर का अविश्वसनीय सफर”

भारतीय सिनेमा का अदृश्य स्तंभ: प्रेम नजीर

भारतीय सिनेमा का इतिहास जब भी लिखा जाता है, उसमें बॉलीवुड के चमकते सितारों का ज़िक्र तो होता है, लेकिन दक्षिण भारत के उस महानायक को अक्सर भुला दिया जाता है, जिसने अपने अभिनय से पूरे देश को मंत्रमुग्ध कर दिया था। प्रेम नजीर—मलयालम सिनेमा का वह नाम, जिसने 900 फिल्मों, 700 से अधिक लीड रोल, और 50 ब्लॉकबस्टर के साथ एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो आज भी अटूट है। यह कहानी है एक ऐसे सुपरस्टार की, जिसने फिल्म इंडस्ट्री की परिभाषा ही बदल दी।

प्रेम नजीर: जन्म से लेकर सिनेमा तक का सफर

प्रेम नजीर का जन्म 7 जनवरी, 1926 को केरल के चिह्नवल्लूर में हुआ था। उनका वास्तविक नाम अब्दुल खादिर था, लेकिन बाद में उन्होंने “प्रेम नजीर” नाम अपनाया। उनके पिता एक पुलिस अधिकारी थे, लेकिन प्रेम का झुकाव बचपन से ही कला की ओर था। 1952 में मलयालम फिल्म “मरुमकल” से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि पहली फिल्म में वे सहायक भूमिका में थे, लेकिन उनकी प्रतिभा निर्माताओं को इतनी पसंद आई कि 1954 में “विस्वलेखा” से उन्हें पहली बार मुख्य भूमिका मिली। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसे सितारे का उदय, जिसने मलयालम सिनेमा को नई पहचान दी।

अद्भुत करियर: आँकड़े जानकर चौंक सकते हैं आप

प्रेम नजीर का करियर सिर्फ लंबा नहीं, बल्कि अविश्वसनीय रूप से विविधतापूर्ण था। उनके आँकड़े किसी परीकथा जैसे लगते हैं:

  1. 900+ फिल्में: 1952 से 1989 तक उन्होंने 907 फिल्मों में काम किया। यानी औसतन हर साल 24 फिल्में।
  2. 700+ लीड रोल: इनमें से 725 फिल्मों में वे मुख्य नायक थे।
  3. 39 फिल्में एक साल में: 1979 में उन्होंने यह अद्वितीय रिकॉर्ड बनाया।
  4. 50+ ब्लॉकबस्टर: उनकी फिल्में न केवल केरल, बल्कि तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी सुपरहिट हुईं।
  5. 40+ डबल रोल: “कुमारसंभवम” (1969) और “अक्कारे अक्कारे अक्कारे” (1982) जैसी फिल्मों में उन्होंने एक साथ दो चरित्रों को जीवित किया।

“सुपरस्टार” की परिभाषा बदल दी!

1970-80 का दशक प्रेम नजीर का स्वर्णिम काल था। उस समय मलयालम सिनेमा में उनकी उपस्थिति इतनी महत्वपूर्ण थी कि “नजीर के बिना कोई फिल्म” एक कहावत बन गई थी। उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उनकी फिल्मों के प्रीमियर के लिए दर्शक रातभर टिकट लाइन में लगे रहते थे। यहाँ तक कि कई बार थिएटरों में दर्शकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ती थी।

गिनीज बुक में दर्ज है उनका नाम

प्रेम नजीर और मलयालम अभिनेत्री शीला की जोड़ी ने सिनेमा इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी। दोनों ने साथ में 130 फिल्में कीं, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में “एक अभिनेता-अभिनेत्री द्वारा सर्वाधिक फिल्मों” के लिए दर्ज है। यह रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। उनकी केमिस्ट्री इतनी प्रसिद्ध थी कि दर्शक उन्हें “सिनेमा की सबसे आदर्श जोड़ी” मानते थे।

बॉलीवुड के सितारों से तुलना: कौन है आगे?

जब प्रेम नजीर के आँकड़ों की तुलना बॉलीवुड के दिग्गजों से की जाती है, तो कुछ रोचक तथ्य सामने आते हैं:

  1. अमिताभ बच्चन: 190+ फिल्में (50 साल के करियर में)।
  2. धर्मेंद्र: 250+ फिल्में।
  3. शाहरुख खान: 100+ फिल्में।
  4. प्रेम नजीर: 900+ फिल्में!

यहाँ तक कि अक्षय कुमार और गोविंदा जैसे अभिनेता, जिन्होंने अपने चरम पर सालाना 10-12 फिल्में कीं, प्रेम नजीर के 39 फिल्में एक साल के रिकॉर्ड के आगे फीके हैं।

रहस्य: इतनी फिल्में कैसे कर पाए?

यह सवाल हर किसी के मन में उठता है: “क्या वे सच में इतनी फिल्मों में काम कर पाते थे?”

  1. समय प्रबंधन: प्रेम नजीर एक दिन में 3-4 फिल्मों की शूटिंग करते थे। उनकी डेली रूटीन 18 घंटे की होती थी।
  2. फोटोग्राफिक मेमोरी: वे स्क्रिप्ट को एक बार पढ़कर याद कर लेते थे, जिससे शूटिंग तेज़ी से पूरी होती थी।
  3. लोकप्रियता का फायदा: निर्माता उन्हें साइन करने के लिए तैयार रहते थे, क्योंकि उनकी मौजूदगी ही फिल्म की सफलता की गारंटी थी।

विरासत: आज भी जिंदा है उनका जादू

3 जनवरी, 1989 को उनके निधन के बाद भी, प्रेम नजीर मलयालम सिनेमा के लिए एक मिथक बने हुए हैं।

  1. पुरस्कार और सम्मान: 1983 में पद्मश्री और 1990 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार (मरणोपरांत) से सम्मानित।
  2. सांस्कृतिक प्रभाव: केरल में आज भी उनकी जयंती मनाई जाती है।
  3. युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा: मोहनलाल और ममूटी जैसे अभिनेता उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

सिनेमा का अमर सितारा

प्रेम नजीर ने साबित किया कि सुपरस्टार बनने के लिए सिर्फ चेहरा नहीं, बल्कि मेहनत और समर्पण चाहिए। उन्होंने न सिर्फ फिल्में कीं, बल्कि हर भूमिका को जीवंत बना दिया। आज जब बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की तुलना की जाती है, तो प्रेम नजीर का नाम उस बहस को समाप्त कर देता है। वे न केवल दक्षिण भारत, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के असली महानायक थे।

“सिनेमा की दुनिया में प्रेम नजीर जैसा दूसरा कोई नहीं हुआ, और शायद न ही कभी होगा।”

प्रेम नजीर की कहानी: एक सरल और मृदुल संस्करण

प्रेम नजीर की कहानी सुनने में जितनी रोचक लगती है, उतनी ही प्रेरणादायक भी है। उनका जीवन और करियर हमें यह सिखाता है कि अगर हम अपने सपनों के पीछे पूरी लगन और मेहनत से जुट जाएं, तो कुछ भी असंभव नहीं है। प्रेम नजीर ने न केवल फिल्मों की संख्या के मामले में, बल्कि अपने अभिनय और समर्पण के माध्यम से भी सिनेमा की दुनिया को प्रभावित किया।

उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनकी फिल्मों के प्रीमियर के लिए दर्शक रातभर टिकट लाइन में लगे रहते थे। यहाँ तक कि कई बार थिएटरों में दर्शकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ती थी। उनकी फिल्मों की सफलता ने मलयालम सिनेमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और उन्हें “मलयालम सिनेमा का महानायक” बना दिया।

प्रेम नजीर की विरासत आज भी जीवित है। उन्हें 1983 में पद्मश्री और 1990 में मरणोपरांत दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केरल में आज भी उनकी जयंती मनाई जाती है और उनकी फिल्में युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। मोहनलाल और ममूटी जैसे अभिनेता उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

प्रेम नजीर ने साबित किया कि सुपरस्टार बनने के लिए सिर्फ चेहरा नहीं, बल्कि मेहनत, समर्पण और प्रतिभा चाहिए। उन्होंने न केवल फिल्में कीं, बल्कि हर भूमिका को जीवंत बना दिया। वे न केवल दक्षिण भारत, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा के असली महानायक थे। उनका नाम सिनेमा की दुनिया में हमेशा अमर रहेगा।

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